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निदेशक के बारे में

इस अनुभाग में
Dr. Giridhar Parvatam, Director, CSIR-CFTRI

निदेशक के बारे में

डॉ. गिरिधर पर्वतम
निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई), मैसूरु

संपर्क

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+91-821-2517760
फ़ैक्स
+91-821-2516308
ईमेल
director.cftri@csir.res.in
पता
सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मैसूरु - 570 020, कर्नाटक, भारत

शिक्षा और करियर

डॉ. गिरिधर पर्वतम ने 1991 में एम.एससी. और 1996 में पीएच.डी. की उपाधि, दोनों तेलंगाना, भारत के काकतीय विश्वविद्यालय से प्राप्त कीं। उनका डॉक्टरेट अनुसंधान विभिन्न मसालों और सूखे मेवों में माइकोटॉक्सिन की व्यापकता पर केंद्रित था, जिसने उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला में सूक्ष्मजैविक खराबी को कम करने के लिए कठोर नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसके बाद उन्होंने तेलंगाना के खम्मम स्थित शांतिनिकेतन डिग्री कॉलेज और एसएसआरजे आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में तीन वर्ष तक सूक्ष्मजीव विज्ञान के व्याख्याता के रूप में कार्य किया। डॉ. पर्वतम 1999 में वैज्ञानिक के रूप में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) से जुड़े और सितंबर 2025 में सीएसआईआर-सीएफटीआरआई के निदेशक बने, जो खाद्य विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

अनुसंधान योगदान

डॉ. पी. गिरिधर ने अपने विशिष्ट अनुसंधान करियर में जैवप्रौद्योगिकी, जैव-सक्रिय द्वितीयक मेटाबोलाइट और खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अनुसंधान एवं विकास पहलों से मूल्यवर्धित खाद्य मेटाबोलाइट के उत्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिनमें एंथोसायनिन, बीटालेन और अन्नाटो रंजक जैसे प्राकृतिक रंग शामिल हैं; साथ ही कैलोरी-रहित मिठास स्टीवियोसाइड और तीखे यौगिक कैप्साइसिन के निष्कर्षण पर भी ध्यान दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, अनुसंधान अध्ययन इंडोल एमीन की पहचान के माध्यम से पादप न्यूरोट्रांसमीटरों के क्षेत्र में तथा कॉफ़ी में पोषण-विरोधी कारक माने जाने वाले डाइटरपीन की खोज में भी गए हैं। गिरिधर के कार्य से कॉर्डीसेपिन और आइसोफ़्लेवोन सहित न्यूट्रास्युटिकल भी प्राप्त हुए हैं। स्वॉलो रूट (अनंतमूल) से वैनिलिन-सुगंध मेटाबोलाइट विकसित करने, कम कैफ़ीन वाले ट्रांसजेनिक Coffea पौधे तैयार करने, तथा Bixa orellanaमें अन्नाटो रंग की मात्रा बढ़ाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।

डॉ. गिरिधर के अन्वेषणों ने कम उपयोग किए जाने वाले पादप भागों, विशेष रूप से Tinospora cordifolia, Rivina humilisऔर Santalum albumके फलों तथा हरी पत्तेदार सब्ज़ियों के पोषण और न्यूट्रास्युटिकल महत्व को रेखांकित किया है। उनकी टीम ने सबसे पहले Basella rubra फल के अर्क के कार्यात्मक खाद्य अनुप्रयोगों का अध्ययन किया। कुल मिलाकर, इन निष्कर्षों का संबंधित खाद्य-उपयोगी मेटाबोलाइट के औद्योगिक उत्पादन पर उल्लेखनीय प्रभाव है।

डॉ. पर्वतम ने पादप आकारजनन और जैव-सक्रिय यौगिकों के उत्पादन को बढ़ावा देने में न्यूरोट्रांसमीटरों, विशेष रूप से सेरोटोनिन और मेलाटोनिन, की भूमिका को स्पष्ट किया है। पादप वृद्धि को बढ़ावा देने वाले राइज़ोबैक्टीरिया (पीजीपीआर) के माध्यम से सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों में वर्णक, लौह और फ़ोलेट बढ़ाकर उनके पोषण प्रोफ़ाइल को सुधारने पर उनके नवीन कार्य के स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। उनके करियर का आरंभिक दौर अनुसंधान के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से चिह्नित था, जिससे संस्थागत उद्देश्यों के अनुरूप निरंतर उपलब्धियों का क्रम बना। इन उपलब्धियों से उद्योग के साथ स्थायी साझेदारियाँ विकसित हुई हैं, विशेष रूप से खाद्य संवर्धन के लिए निर्जलित हरी पत्तेदार सब्ज़ियों के पाउडर और पाक अनुप्रयोगों के लिए स्वॉलो रूट से प्राकृतिक वैनिलिन सुगंध मेटाबोलाइट के निष्कर्षण के क्षेत्रों में।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

डॉ. गिरिधर पर्वतम ने सरकार द्वारा वित्तपोषित अनुसंधान फ़ेलोशिप और परियोजनाओं के माध्यम से दो प्रमुख वाणिज्यिक फ़सलों, कॉफ़ी और सोयाबीन, की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. एवाल्ड कोमोर के मार्गदर्शन में जर्मनी के बायरॉयथ विश्वविद्यालय में डीएएडी अध्येता के रूप में विदेश प्रवास (1995-96) ने सीएफटीआरआई लौटने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की नींव रखी। उल्लेखनीय है कि भारत-बुल्गारिया परियोजना (2007-08) के दौरान डॉ. गिरिधर ने बुल्गारियाई सोयाबीन किस्मों से इन विट्रो प्रोटोकॉल विकसित करने और जैव-सक्रिय यौगिकों को पृथक करने में विशेषज्ञता निखारी। डीएसटी-बॉयस्कास्ट फ़ेलोशिप के अंतर्गत डॉ. अलेक्ज़ेंडर डी कोचको के मार्गदर्शन में फ़्रांस के आईआरडी के प्रतिष्ठित कॉफ़ी जीनोमिक्स अनुसंधान समूह (2005-2006) से जुड़ाव ने उन्हें कॉफ़ी जीनोमिक्स की गहन समझ दी, जिसे उन्होंने बाद में डीबीटी और एसईआरबी द्वारा समर्थित अपनी परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण प्राप्त कर आगे बढ़ाया। सीएसआईआर-बीएमबीएफ (भारत-जर्मन) पहल के अंतर्गत जर्मनी के लाइबनिज़ विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी से, जो क्रिस्पर-कैस9 प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर केंद्रित है, उनके अनुसंधान का दायरा और विस्तृत हुआ।

संपादित पुस्तकें

  • Coffee Science: Biotechnological Advances, Economics, and Health (CRC Press, 2021)
  • Benefits & Tropane Alkaloids: Sources, Chemistry, Pharmacology and Biotechnology (Springer, 2025)

फ़ेलोशिप और सदस्यताएँ

  • रॉयल सोसाइटी ऑफ़ बायोलॉजी के फ़ेलो (FRSB)
  • नेशनल एकेडमी ऑफ़ बायोलॉजिकल साइंसेज़ के फ़ेलो (FNABS)
  • एसोसिएशन ऑफ़ फ़ूड साइंटिस्ट्स एंड टेक्नोलॉजिस्ट्स के फ़ेलो (FAFSTI)
  • आंध्र प्रदेश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ के फ़ेलो (FAPAS)
  • एकेडमी ऑफ़ प्लांट साइंसेज़, इंडिया के फ़ेलो (FAPS)
  • भारतीय वनस्पति सोसाइटी के फ़ेलो (FBS)
  • सोसाइटी फ़ॉर एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी के फ़ेलो (FSAB)
  • राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इलाहाबाद के निर्वाचित सदस्य
  • प्लांट टिशू कल्चर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के निर्वाचित सदस्य

पुरस्कार

  • विशिष्ट वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार, सीएसईआर (सेंटर फ़ॉर सोसाइटल एंड एनवायर्नमेंटल रिसर्च), रांची द्वारा प्रदत्त, 2023
  • भारतीय वनस्पति सोसाइटी का प्रो. वी. पुरी स्मृति पदक, 2021
  • सोसाइटी ऑफ़ ट्रॉपिकल एग्रीकल्चर, इंडिया का उत्कृष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार, 2019
  • एशियन बायोलॉजिकल रिसर्च फ़ाउंडेशन, प्रयागराज का वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार, 2019
  • एसोसिएशन ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी एंड फ़ार्मेसी का वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार, 2018
  • एकेडमी ऑफ़ प्लांट साइंसेज़, इंडिया का अंतरराष्ट्रीय पादप वैज्ञानिक पुरस्कार
  • नेशनल एकेडमी ऑफ़ बायोलॉजिकल साइंसेज़ द्वारा सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार (खाद्य प्रौद्योगिकी), 2015
  • एसोसिएशन ऑफ़ फ़ूड साइंटिस्ट्स एंड टेक्नोलॉजिस्ट्स, इंडिया का खाद्य वैज्ञानिक हेतु लालजी गोधू स्मारक निधि पुरस्कार, 2012
  • सीएसआईआर-सीएफटीआरआई सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक पुरस्कार, 2012
  • आईएसएमपीपी का प्रो. एच.सी. दुबे उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, 2010
  • भारतीय वनस्पति सोसाइटी का वरिष्ठ वनस्पतिशास्त्री हेतु प्रो. वाई.एस. मूर्ति स्मृति स्वर्ण पदक पुरस्कार, 2009
  • एकेडमी ऑफ़ प्लांट साइंसेज़, इंडिया का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, 2003

व्यावसायिक सेवा

डॉ. गिरिधर भारत सरकार के बीआईएस से सुगंध एवं सुवास अनुभागीय समिति (PCD-18) के सदस्य के रूप में, एफ़एसएसएआई के वैज्ञानिक पैनल (SP1) के सदस्य के रूप में, तथा 2021-2025 के दौरान सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूर में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के नोडल वैज्ञानिक के रूप में जुड़े रहे हैं। उन्होंने जनवरी 2024 से सितंबर 2025 तक सीएफटीआरआई, मैसूर की रेफ़रल खाद्य प्रयोगशाला के निदेशक के रूप में भी कार्य किया।

अनुसंधान उपलब्धियाँ

अपने प्रतिष्ठित शैक्षणिक और व्यावसायिक करियर में डॉ. गिरिधर ने 17 पीएच.डी. शोधार्थियों और 51 शोध प्रबंध विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उनके अनुसंधान से 9 पेटेंट प्राप्त हुए हैं और 231 से अधिक शोध लेख प्रकाशित हुए हैं, जिनका h-सूचकांक 53 और i-10 सूचकांक 150 है। डॉ. गिरिधर के कार्य को 8,635 से अधिक बार उद्धृत किया गया है और उन्हें भारत की विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं से 16 पुरस्कार मिले हैं।

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